हे कविते!

हे कविते! तू  क्या है?
माला है मोतियों की तू सरल
अल्फ़ाज़ तेरे अनमोल मोती हैं।
तेरे हर एक अक्षर -अंग में
हर कवि की भावना होती है।
तू आग है, तू राग है, तू रंग है,
जैसे मेरे जीवन में तेरा संग है।
किसी प्रेमी के राज-ए-दिल की अभिव्यक्ति का
तू एक आसान -सा ज़रिया है।
आसमान में पंछी-सी उड़े तू
बागों में खिले, वो कलियाँ हैं।
तू लगे गुरु-सी, है सखी भी तू
तू उमंग भरे, मैं बातें बाँटू!
तू खुशी भी मेरी, मेरा प्रेम भी तू
रचना में तेरी मैं रातें काटू।
लगे कभी तू गरल, कभी सोम है,
क्या पत्थर को बनाती तू मोम है?
तू धूप है, तू छांव है
मेरे सपनों वाला तू गाँव है।
तू आनंद है, रोमांच का जाम है
तू जीवन की सुबह, तू ही शाम है।
हर प्रश्न का मेरे तू उत्तर है
तू ज्ञान, तेरा अर्थ महत्तर है।

-आरती मानेकर

My favorite poem from my collection…
It shows the relation of me with poems…😊😊😊😊😘😘

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104 thoughts on “हे कविते!

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