वो देखो डॉक्टर , मारो साले को।

डर लगता है रास्ते पर चलने से
डर लगता है घर से निकलने से
डरता हूँ मैं अस्पताल में काम करने से
डरता हूँ मैं मरते इंसान को बचाने से
क्या करूँ मन से इस डर को निकालने को
वो देखो डॉक्टर, मारो साले को।

जब छोटा तब मरीज की सेवा करने का जूनून था
डॉक्टर बनूँगा , ये बोलने में ही सुकून था
लोग कहते “आप का बेटा बहुत होशियार है डॉक्टरी में लगा दो, करियर तैयार है”
हुए तैयार जी तोड़ मेहनत करने को
वो देखो डॉक्टर , मारो साले को।

घर से सालों-साल दूर रहा मैं
दिन-रात किताबों में डूबा रहा मैं
जब अपनी जवानी मरीजों के संग बिताई
तब जाकर डॉक्टरी कुछ समाज में आई निकला था मैं रोगी की सेवा करने को
वो देखो डॉक्टर , मारो साले को।

जब मेरे दोस्त इंजीनियर बन डॉलर कमा रहे थे
मेरा खर्चा तो मेरे पापा उठा रहे थे
इधर घरवाले शादी-ब्याह-त्यौहार अकेले मनाना सीख रहे थे
उधर हम पेशाब-टट्टी-खून की जांच से जूंझ रहे थे
पढ़ते रहे हम हज़ारों पन्ने मुख़स्त कर जाने को
वो देखो डॉक्टर , मारो साले को।

जब सब संगी साथी विदेश जाने का कहते थे
मैं यहाँ रहकर सेवा का लाभ लेना चाहता था
हुआ “सरकारी डॉक्टर” बन ही गया सरकारी
बाबू मेरा शाहब बन बैठा,शाहब हुए मौनी बाबा
हुआ बखेड़ा बनाया मुझे दोषी, पकड़ाया 16/17 सीसी
निरपाध मैं, न था कुछ सफ़ाई देने को
वो देखो डॉक्टर , मारो साले को।

सुना था डॉक्टरी बहुत ही ऊँचे दर्जे का काम है
क्या पता था, ऊँचे दर्जे का तो सिर्फ नाम है
आज भी आँखें उस इंसान को ढूंढ़ती है
जो कहता था, डॉक्टर बनने से इज़्ज़त मिलती है
जी करता है उसी को डॉक्टर बनाने को
वो देखो डॉक्टर , मारो साले को।

मिर्गी का दौरा लेकर भर्ती हुआ एक बच्चा था
दवाइयाँ दी सब, लेकिन परिणाम न कुछ अच्छा था
दो दिनों से ड्यूटी था मैं कर रहा
आँखों में नींद, शरीर था मेरा थक रहा
लगा हुआ था फिर भी उसकी जान बचाने को
वो देखो डॉक्टर, मारो साले को।

आँखों के सामने अंधकार छा रहा था
मृत्यु की ओर बच्चा खिंचा जा रहा था
कोशिश की बहुत यम से जीतने उसकी जान को
पर बचा न सके हम उस नन्ही जान को
कोस रहा था मैं जब उपरवाले भगवान को
सामने से आवाज़ आई –
“वो देखो डॉक्टर, मारो साले को।”

-डॉ. जितेंद्र कुमार ताम्रकार

About the author:
Dr Jitendra Kumar Tamrakar  is 1 of  my best friends. He is a doctor by profession, Medical Officer in Community health centre, Gandai,
Rajnandgaon, Chhattisgarh. He has passed his MBBS in 2011 from Chhattisgarh Institute of Medical Science (CIMS), Chhattisgarh. You can contact him on his FB page #Dr Jitendra Kumar Tamrakar Medical Officer or you can mail him  Rxtamrakar@gmail.com .
As his busy schedule, he don’t write continuously like we bloggers write, bt writing poems is his comfort zone.

Happy Doctor’s Day….
The presented poem is written by a doctor himself showing the conditions of doctors in our society. 😇

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32 thoughts on “वो देखो डॉक्टर , मारो साले को।

  1. Sometimes im angry on Dr.’s,
    Bcoz, sometimes situations money is not important than patients life..and generally for his/her family’s or attach buddy’s. And economical conditions.. …
    Tysm Arti …

    Liked by 1 person

      1. I agree with u Dr Jitendra… 🤗…
        Nice to have ur presence here. Thanks…
        Prasanna… I read ur comment yesterday, bt I didn’t have any ans for ur comment, perhaps u have got ur ans now…🤗

        Like

  2. डॉक्टर डॉक्टर होते हैं ईश्वर नहीं वो शिद्दत से अपना काम करते हैं इसलिए उनके काम पर शक़ करना ठीक नहीं.

    वो पर्यास कर सकते है जीवन देना-लेना उस मालिक का काम है.

    बहुत खूब लिखा आपने.

    Liked by 1 person

  3. मर्मस्पर्शिय .. मर्म को छू गया डाक्टर साहेब को बधाई .. Arti you are an angel thanks for sharing it ..

    Liked by 1 person

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