समझौता

चलो आज करें हम एक समझौता 

एक समझौता 

जिसमें प्रेम न होगा 

न होगा जिसमें अहंकार ही 

एक रिश्ता होगा सर्वसम्मति का

एक रिश्ता केवल आवश्यकताओं का!

विवाह बंधन में बंध जाएंगे 

एक ही छत में रह जाएंगे 

मन – मन से न मिलने पाएं 

और तन क्षण में कई बार मिलेंगे।

न जोर होगा तुमपर मेरा

न मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा 

दिन व्यस्तता से बीत सकें 

और थकान मिटाने का साधन तुम!

देखो, काम वासना होती सब में 

और प्रेम पवित्र बंधन है 

समय कहां निभाने इसको 

किंतु भोग लिप्सा आवश्यक है।

-आरती मानेकर

Just tried to write something out of my comfort zone!!!

40 thoughts on “समझौता

  1. Reblogged this on bhaatdaal and commented:
    दिल को छू लेने वाले भाव ,असीमित विवशताओ के बीच ये जीवन बस कर्म और धर्म में बँटा हुआ ।

    Liked by 2 people

  2. Maine ab se teri kisi post pe comment nahi karna. As I say Girl with Midas Touch, whatever you do is exceptional and it’s routine to praise each and every post, hence not commenting henceforth as it’s implied by default that you’re the best.

    Liked by 2 people

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