पुस्तक समीक्षा (Book Review): रूह से रूह तक

लेखक: विनीत बंसल

लेखक परिचय: औपचारिक रूप से खुद कहीं से लिखना नहीं सीखा पर यूनिवर्सिटीज़ और कालेजों में विद्यार्थियों को लेखन-कला के गुर सिखाने जाते हैं। अंग्रेजी में 7 और हिन्दी में 2 किताबें लिख चुके हैं। 2 किताबों पर काम जारी है। महाबली खली के साथ मिलकर उनकी जीवनी लिख चुके हैं। और भी कई नामचीन हस्तियों के साथ काम किया है और कर रहे हैं। जल्द ही टी.वी. स्क्रिप्ट लेखन में भी हाथ आजमाने आ रहे हैं। यूं तो भारतीय स्टेट बैंक में ऑफिसर हैं पर इतना लिखने और पढ़ने का समय कहाँ से निकालते हैं, ये पूछने पर कहते हैं कि- सपनों में। कहते हैं कि मैं सपने बहुत देखता हूँ, कल्पनाएँ बहुत करता हूँ, अपने आप से ज्यादा आप में रहता हूँ। इनका मानना है कि किताबें समाज और व्यक्तित्व का आईना होती हैं और शायद यही कारण है कि वो अपनी इसी सोच को शब्दों की माला में पिरो कर किताबों के माध्यम से जिंदगी में प्यार और रिश्तों की अहमियत को संजीदगी से दिखाने की कोशिश करते हैं।

पुस्तक के बारे में: गर ना समझें तो यह महज़ एक कहानी है, एक किताब है… बाकी और किताबों की तरह, जिसे आप पढ़ते हैं और भूल जाते हैं। समझें तो एक कोशिश… उस शय के सबसे सच्चे और सुच्चे स्वरूप को जानने की जिसे हम सभी प्रेम कहते हैं।

कहानी की शुरुआत होती है नील से। किस तरह से एक छोटे से शहर का सीधा-सादा सा लड़का यूनिवर्सिटी में आता है और उसकी चकाचौंध में खो जाता है। पहले ही दिन उसकी मुलाकात होती है रणदीप से- यूनिवर्सिटी का सबसे रुआबदार लड़का। दोनों दोस्ती से कुछ आगे बढ़कर एक-दूसरे को भाई समझने लगते हैं। इसी बीच नील को प्यार हो जाता है- सच्चा प्यार, अदिति से। प्यार रणदीप को भी होता है- रिया से, लेकिन एकतरफ़ा प्यार। परिस्थितियाँ कुछ यूँ करवट लेती हैं कि रिया आत्महत्या कर लेती है और जाने से पहले अपनी हत्या का इल्जाम लगा जाती है नील पर।

 क्या नील रणदीप को अपने बेगुनाह होने का यकीन दिलवा पाता है?

क्या होता है जब आपका सबसे अच्छा दोस्त आपका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाता है?

क्या होता है जब प्यार सनकपन की सभी हदें पार कर जाता है?

क्या होता है जब आपको प्यार और जिंदगी में से किसी एक को चुनना पड़ता है?

क्या नील और अदिति प्यार की उस ऊंचाई को हासिल कर पाते हैं?

क्या दोनों एक हो पाते हैं?

जवाब पुस्तक में है- “रूह से रूह तक”!

मेरा मत: “रूह से रूह तक- क्योंकि दिल भर जाते हैं और जिस्म मर जाते हैं”, शीर्षक ही इतना सुंदर और रोचक है कि सहज ही मन इसे पढ़ने को लालायित हो उठता है। एक प्रेमकथा है, जो प्रेम के अर्थ को सार्थक करती है। कहानी का शुरुआती हिस्सा दर्शाता है कि कहानी कुछ पुरानी है, किंतु जैसे ही आप आगे पढ़ते हैं तो आप कहानी में नयापन पाएंगे। आज ही के समय का देशकाल पार्श्वभूमि में है, जब तक आपके पास सबूत नहीं है, आप गुनहगार है। कहानी में जेल का जैसा चित्रण लेखक की लेखनी ने किया है, ठीक यथार्थ जैसा है। बहुत खुबसूरत दोस्ती और बहुत खतरनाक दुश्मनी का भी वर्णन है, जो रिश्तों की वास्तविकता से रूबरू करवाता है।  लेखक ने हर छोटी चीज का बहुत सुंदर व सच्चा चित्रण किया है, चाहे वह अदिति से नील की पहली मुलाकात हो या रणदीप का अदिति पर अत्याचार!

प्यार, दोस्ती, डर, बदला, क्रोध हर भाव कहानी में है। हिंदी के लचीलापन वाले गुण का लेखक ने खूब लाभ लिया है, इसी कारण से भाषा में अंग्रेजी के शब्दों की भरमार है, किंतु आज के बदलते हुए युग को देखकर यह खामी विशेष नहीं लगती। यह कहा जा सकता है कि भाषा ठीक वैसी है, जैसी आप बढ़ना चाहेंगे। कहानी के तीन चौथाई भाग तक तो शीर्षक का यथार्थ नहीं दिखता, किंतु अंतिम भाग के दृश्य और भाषा पूरी तरह से शीर्षक को सार्थक करती है। कई अपशब्द भी प्रयोग हुए हैं, किन्तु वे कहानी की आवश्यकता है। व्याकरण में हुईं गलतियों को इतनी सच्ची कहानी के पीछे छुपाया जा सकता है। 

उपसंहार: सार रूप में आपकी आंखों को आंसू गिराने पर विवश कर दे, ऐसी कहानी है!

अपनी प्रति यहाँ से प्राप्त करें – Rooh se Rooh tak

स्टार रेटिंग: 4/5

आरती मानेेकर

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