बिना रंगों की होली

होली खेलने की चाह थी उनकी हमारे साथ,
बुलाया हमने फिर उनको अपने पास।
बाहों में ले के इतने समीप,
कि वो हो गए निर्भीक।
हमने रंगा उनके लबों को अपने लबों से,
हर तरफ होली के रंग बिखरे थे हजार।
लेकिन उनकी आंखों में था रंग एक,
उन पलों में हम हो गए थे एक।
वो पल थे जैसे कि वर्ष हजार।
हो रहे थे वो मेरी बाहों में ज़ार- ज़ार।
फिर मेरे लब थे और उनका माथा।
यहाँ से शुरू की हमने उस रात की प्रेम गाथा।
उस रात हमने किये हजार मिलन।
बस मेरी ही छविलीन थे उनके नयन।
हमने बिना रंगों के थी खेली होली।
लेकिन उनका हर अंग लाल था जैसे रोली।

-My Bau

A very Happy Holi to everyone…

And here is the Holi Special Post… written by part of me… My Bau…🙈🙈🙈🙈

Write down in comment, how you feel about the post…

Stay connected…🙌

-Arti Manekar

Advertisements