समझौता

चलो आज करें हम एक समझौता 

एक समझौता 

जिसमें प्रेम न होगा 

न होगा जिसमें अहंकार ही 

एक रिश्ता होगा सर्वसम्मति का

एक रिश्ता केवल आवश्यकताओं का!

विवाह बंधन में बंध जाएंगे 

एक ही छत में रह जाएंगे 

मन – मन से न मिलने पाएं 

और तन क्षण में कई बार मिलेंगे।

न जोर होगा तुमपर मेरा

न मेरे जीवन पर अधिकार तुम्हारा 

दिन व्यस्तता से बीत सकें 

और थकान मिटाने का साधन तुम!

देखो, काम वासना होती सब में 

और प्रेम पवित्र बंधन है 

समय कहां निभाने इसको 

किंतु भोग लिप्सा आवश्यक है।

-आरती मानेकर

Just tried to write something out of my comfort zone!!!

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Let Us Ignite The Fire…

Let Us Ignite The Fire

Of love…

All the hate may come out

And burn…

Let Us Ignite The Fire

Of friendship…

Enemies will thaw out

And turn…
Let Us Ignite The Fire

Of trust…

No one can cheat other 

And lie…

Let Us Ignite The Fire

Of goodness…

All the evil may burn

And die…
Let Us Ignite The Fire

Of happiness…

Smile should be everywhere 

And no tear…

Let Us Ignite The Fire

Of intrepidity…

All may stand with confidence 

And no fear…
Let Us Ignite The Fire

Of reality…

Everyone may know truth 

And shine…

Let Us Ignite The Fire

Of humanity…

All hearts will be pure 

And Divine…
Let Us Ignite The Fire

Of knowledge…

Perceptions will be worthy 

And new…

Let Us Ignite The Fire

Of change…

Devil may turn into human

And live…

-Arti Manekar

आज लिख…

आज लिख कुछ ऐसा, जैसे बचपन का प्यार हो।

अभी हरे घावों पर, जैसे एक नया – सा वार हो।।

लिख ऐसे कि मुक्त आज, बंधे हुए सब विचार हो।

लिख ऐसे शब्द कि जिनमें, संवेदना अपार हो।।

लिख तू ताकि आंखों में, तेरे मृदु हास्य तैयार हो।

लिख कि तेरी बातें, डूबती नाव की पतवार हो।।

लिख ऐसे कि हृदय में, आज प्रेम का संचार हो।

लिख तभी तो प्रेम – सूत्र, सर्वत्र अंगीकार हो।।

लिख कि बाकी मुझपर तेरा, इतना – सा अधिकार हो।

तुझमें – मेरा, मुझमें – तेरा, विस्तृत बसा संसार हो।।

-आरती मानेकर