सुकून

देख रहे हो ना!
उस तस्वीर में,
तुम्हारी परछाई को
प्रतिबिंबित करते
मेरे माथे पर सजे
कुंदन को!
मेरी पलकों के
गिर जाने से
बंद हुईं
मेरी लजाती आँखों को!
तुम्हारे चूमने से
गर्द हुए
मेरे फुले गालों को!
मेरे होठों के कोरों के
थोड़ा और फैल जाने से
बनी
मेरी उस मुस्कान को!
तुमने अपने हाथों से
सँवारे,
काँधे पर बिखरे पड़े
मेरे बालों को!
तुम्हारी अंगुलियों को
अपने में समाहित किए
बंद मेरी मुट्ठी को!
सीने से सरककर
जमीन पर गिरे
मेरे खादी के
हरे वाले दुपट्टे को!
द्योतक हैं वे सब
सुकून के!
उस सुकून के
जो मैंने पाया है,
तुम्हारे सीने से
लग जाने से,
तुम्हें पाने से!
वो क्षण अद्भुत था,
जब हँसी और आँसू
एक साथ आए थे
चेहरे पर मेरे!
सुकून दर्शाने को!
तुम्हें पा जाने का;
तुम्हें सीने से
लगाने का!
कभी झल्ला दूँ
तुमपर,
या लड़ लूँ
किसी दिन तुमसे,
और फिर मनाऊँ
आप ही तुमको,
या सहम जाऊँ
या हँस दूँ
तुम्हारी डाँट पर,
तो हैरत मत करना।
कि यह भी सुकून है!
कि हक़ है मेरा
तुम पर,
तुम्हारे प्यार पर!
यह हक़ मेरा
बरकरार रखना।
सुकून है
तुम्हारे प्यार में।
जैसा है आज
वैसा ही कल
अपना प्यार रखना!
-आरती मानेकर

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पहले मिलन की बात

तेज-तेज बढ़े थे कदम
और साँसें यकायक बढ़ रही।
बैचैन हो चला था मन
और अधरों पर थी खुशी।
पहले मिलन की बात थी,
कि आँखें ढूँढ़ती रहीं;
साक्षात देख सजन को
थी सजनी मौन रही।
अधरों से बोला न गया
बातें किंतु न चुप रहीं।
खोए थे ऐसे वे कि
आँखें उनकी बोलती रहीं।
प्रेमालिंगन हुआ था ऐसा
बाहें थीं, फूलमाल नहीं।
कितने सुंदर लगते थे वे,
यथा उर का आकार यही।
मस्तक पर कोमल चुम्बन
यह प्रेम से पृथक् था नहीं।
समय रुका हुआ लगता था,
निशा को कदाचित जल्दी नहीं।
एक थे उनके तन-मन सारे,
दो हाथों की मुट्ठी एक बनी रही।
अनामिका में अंगुठी तब से
प्रेमाभिव्यक्ति का प्रमाण बनी रही।
श्रृंगार किया सजन ने नख-शिख का,
थी सजनी शर्म से लाल हो रही।
पायल टूटी फिर उतावलेपन में,
किन्तु उसकी झंकार बनी रही।
भास्कर सम तेज़ था उनका,
‘आरती’ वो भी जलती रही।
उष्णता, शीतल रात में इतनी;
थी प्रेम का उत्पाद वही!
प्रेमोन्माद में थे वे दोनों,
आँखें सारी रात जागती रही।
खूब चाँदनी बिखरी धरा पर,
वो इस मिलन को निहारती रही।
कितनी खुशी, कई सारी बातें,
अश्रुलडीं भी न निःस्पर्श रही।
स्मृति इन अमूल्य क्षणों की,
थी तस्वीरों में कहीं-कहीं।
वियोग के क्षण आँखें न मिलींं;
खूब रोईंं, निर्झर बनी रहींं।
प्रेम के इस अपरिचित शहर में
प्रेमपूर्ण उर धड़के थे कहीं!
चिरायु हो वो प्रेमी युगल, कि
शुभकामना जग की बनी रही।
हो वर्णन इस प्रेम मिलन का,
मेरे शब्दों में वो बात नहीं!
-आरती मानेकर

मिलन का उतावलापन

थका बदन

आँखें उनींदी

गवाही दे रहे हैं

तुम्हारे लिए

मेरे प्यार की।

सारी रात किए

तुमसे मिलन के

इंतजार की।

कुछ उतावलापन है,

कुछ घबराहट

हरकतें बचकानी हैं,

प्यार, तुम्हारे यार की!

बाहें हार बनी

कदम तेज हैं,

गालों पर हया;

धड़कनें बढ़ रही हैं

दिल-ए-नादां की!

लबों ने सजाई 

मुस्कान प्यारी है,

मिलो तो चूम लेना।

ये बात है मेरे

अपने खयाल की।

मेरी मुस्कान

तुमसे दगा करेगी;

पिया! आँखों में

देखना तुम मेरे।

आँखें सुनती नहीं है,

बातें जुबां की।

आँखें सूजी हैं,

रात बहुत रोई हैं,

जरूरत खूब है अब

यार के दीदार की।

वक्त बीते जा!

अल्फ़ाजों सो जाओ!

मिलन के बाद

दास्तां लिखूँगी मैं,

मिलन वाली शाम की।

-आरती मानेकर

Book Review: The Stupid Somebody

An emotional rollercoaster tale of love, life and conquering world.

Author: Rohit Dawesar

About the Author: Rohit Dawesar is an author from Indore who is well-known for the nano-tales and short stories that he posts on his website and social media platforms. The Stupid SOMEBODY is his debut book. He is also the co-founder and Director of a food chain named The Urban Gumti (Pumpkin Foodworks Pvt. Ltd.), co-founder, ex-Director at Entrepreneurs Consulting Pvt. Ltd. and owner of X World Engineering and MBA Coaching Institute. Rohit conducts motivational sessions to add value to our society.

Know more about Rohit Dawesar by visiting www.rohitdawesar.com . Also join him on:

Instagram: rohitdawesar

Twitter: imrohitdawesar

Facebook: rohitdawesarlive

Blurb: “My d-d-dream! Umm, my dream is… That one day, I will be standing outside an auditorium, a packed house a-a-a-auditorium. People there would be waiting to hear me speak. They would be chanting my name. We love R-R-R-Rohit, We love Rohit,” he said, looking into her mesmerizing eyes.

After seventeen years, Sherly was standing in his house, holding a copy of his first novel in one hand, and her wedding invitation card in another. She was getting married in four days.

Join Rohit in his journey as he sets off to conquer the greatest obstacle of his life, and how on the way he finds out that his childhood dream was the thread connecting everything happening in his life. Will he lose her on his journey of his life time?

My views: Lemme first talk about the book cover and the title. Both are superbly able to tell the story just by reading the title and by looking at the cover. The cover has all the major facts about the story on it. Talking about the story, it is a book in book, that you’ll understand after reading the book. Staring is just so cute, crazy school life, childhood crush,sweet friendship and dreams in eyes. The main character named Rohit, I found him very inspirational and dedicated towards both his dream and his love. Rest all the characters are also realistic and original. Description of Sherly is really attractive. It’s a love story and there are many ups and downs in every love stories. Rohit and Sherly fight with each other and get back to their relationship. I can simply relate this to that of my life…🙈  

Rohit is a master of all his plans, that he could not harm anyone and get his love back. That’s really impressive and gave me strength too. The story goes with a very good flow that author planned it fantastically.

Language used in the story is very good. Conversation is good too, I could sense humor in most diologues written there and that is the plus point. Author drew my attention by writing very little things there like the pronunciation of the word “babba” and many more… 

It is a story of struggles and hardwork. A big example is given in the story. And one thing to mention I didn’t really find any flaw in the book.

I was already a fan of author’s nano-tales and sweet stories and after reading the fantastic novel, I simply fell for him.😍

Conclusion: I found it related and loved it. I’m sure you are gonna love it too.

Star rating: 🌟 🌟 🌟 🌟🌟 (5/5)

You can get your copy here: The Stupid Somebody .

Thanks for reading.

-Arti Manekar

चावल का दाना

अक्षत, अक्षय, अखण्ड, अनाज वह

देवों को अर्पित होता है,

वही बन के रोली रक्षाबंधन पर

भाई के माथे पर सुहाता है।

उत्सर्ग के क्षण बनके धान वह,

धरती के सीने पर लहराता है।

चार दाने चावल ही कभी

शुभकार्यों का निमंत्रण बन जाता है।

माँ की रसोई में खुशबू बिखेर,

पिताजी की थाली में खिलखिलाता है।

भाभी की पहली रसोई के दिन

खीर का स्वाद बढ़ाता है,

अन्य अनाजों के संग सांझा कर

कितने ही पकवान बनाता है।

देर रात काम से लौटे बेटे के
उदर का आधार बन जाता है।

 पुण्यवचन के चावल का दाना,

किसी का उपवास पूरा करवाता है।

फिर क्यों विवाह के सुक्षणों में

पैरों के नीचे रौंदा जाता है?

व्यर्थ अनाज का यह परिमाण

दीनों की क्षुधा नहीं मिटाता है!

और देखो हमारे ‘सभ्य’ समाज को

बेकार परंपराओं पर इतराता है!

मंगलाष्टक के क्षण, अक्षत का स्थान

पुष्प-दल भी तो ले सकता है;

सच है, नई सोच को अपनाकर ही

परिवर्तन लाया जा सकता है!

-आरती मानेकर

पुस्तक समीक्षा: विद यू विदाउट यू

लेखक: प्रभात रंजन

लेखक परिचय: पेशे से इंजीनियर एक ऐसे व्यक्ति जो जीवन और रिश्तों की आयातित कृत्रिमता व मौलिक सहजता के उलझे सूत्रों, विकृतियों को समझने, सुलझाने का प्रयास अपनी साहित्यिक रुचि, पठन व लेखन के द्वारा करना चाहते हैं एवं जिन्हें आसपास की वैसी हर एक हलचल गंभीर रूप से प्रभावित करती है जो हजारों साल के मानव विकास यात्रा की कड़ी के रूप में उन्नति न हो कर वस्तुतः अवनति हो।

पुस्तक के बारे में: रमी के लिए निशिन्द दोस्त है तो आदित्य प्यार, लेकिन निशिन्द के लिए रमी दोस्त भी है और प्यार भी। रश्मि देसाई के लिए आदित्य दोस्त है तो निशिन्द प्यार, लेकिन निशिन्द के लिए रश्मि देसाई सिर्फ दोस्त है।

जीवन के दो भिन्न मोड़ों के बीच दोस्ती और प्यार की उलझन को सुलझाती, प्यार वाली दोस्ती और दोस्ती वाला प्यार के बीच के फर्क को समझाती, सच्चे प्यार और सच्ची दोस्ती की परिभाषा गढ़ती, एक-दूसरे से जुड़ी दो प्रेम कहानियां।

मेरा मत: 

सबसे पहले बात शीर्षक की करते हैं- शीर्षक आकर्षक तो है किंतु एक साधारण कहानी और एक हिंदी की कहानी में अंतर नहीं बता पाता। ऐसा नहीं कि शीर्षक सुंदर नहीं, सुंदर है और सार्थक भी, किन्तु इतनी सुंदर हिन्दी कहानी के लिए हिन्दी भाषा में भी बहुतायत में सुंदर शब्द उपलब्ध हैं। इसी प्रकार विषयवस्तु तो अच्छी हिन्दी में है, साथ ही अगर संवाद में अंग्रेजी के शब्दों की कमी होती तो अधिक अच्छा होता। पात्र सीमित किन्तु प्रभावशाली है। हाँ नाम थोड़े भ्रामक है, जैसे निशी यह नाम पुल्लिंग नहीं वरन् स्त्रीलिंग का बोध कराता है।

अभियंता होते हुए भी लेखक ने मार्केटिंग विषय का खूब अच्छा अध्ययन करके पुस्तक में दर्शाया है। कहानी थोड़ी अधूरी-सी लगती है, जैसे यह केवल निशिन्द और रश्मि के इर्द- गिर्द घूमती है, जबकि कहानी पढ़ते समय निशिन्द के परिवार के बारे में और अधिक जानने की इच्छा होती है। लेखक ने पूरी कहानी एक सहज रूप में प्रस्तुत की है। कुछ महत्वपूर्ण शिक्षा भी कहानी में है, जैसे व्यक्ति को गलत के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

कहानी पढ़ते समय पाठक के मन में भी रश्मि के लिए वही जिज्ञासा उत्पन्न होती है, जैसी निशिन्द के मन में। चरित्रों के माध्यम से अपनी बात पाठकों तक पहुंचाने में लेखक सफल रहे हैं। है तो एक प्रेम कहानी, किन्तु प्रेम के साथ और भी कई मानवीय भावों की व्यंजना कराती है।

कहानी का अंत काफी सुंदर व मार्मिक रूप से हुआ है। ऐसा लगा कि कहानी खत्म नहीं होनी चाहिये थी।

उपसंहार: प्यार, दोस्ती और इन दोनों के मिश्रितरूप को सुन्दरता से समझाने वाली कहानी है।

स्टार रेटिंग: 4/5 

अपनी प्रति यहाँ से प्राप्त करें: विद यू विदाउट यू .

आरती मानेकर