मैं फेमिनिस्ट हूँ!

मुझे पसंद है खुद ही तारीफ़ें सुनना,
तुमको भी तो होगा ही शायद!
मैं जिंदगी मेरे जैसे जीती हूँ,
सिर्फ मेरे लिए तो नहीं है क़वायद।
माहवारी में होने वाले असीम दर्द से
मैं तड़प कर रो देती हूँ।
किन्तु उस दर्द के लिए तुम्हें गालियाँ दे दूँ?
ऐसा करने वाली मैं कौन होती हूँ?
पढ़ने के मौके हम दोनों को
बराबर ही मिले हैं
मैंने रसोई के साथ किताबों में ध्यान लगाया।
अपनी-अपनी जिंदगी है,
तुमने किताबों से हटकर
रसोई में अपना नाम कमाया।
मैं सोशल मीडिया पर
बराबरी की खूब बातें करती हूँ।
कभी मेरे साथ बाहर चलो,
खाने का बिल मैं भी भरती हूँ।
ये ‘लेडीज़ फर्स्ट’ वाला विचार
मुझे कुछ खास नहीं भाता है।
आप लाइन में तमीज़ से खड़े तो रहिए,
अपनी बारी का इंतजार करना मुझे आता है।
हाँ, मैं अपनी मनमर्जी कपड़े पहनूँगी
और सलवार कमीज़ मेरा पसन्दीदा है।
चिड़िया बनकर चहकना है मुझे,
व्यवहार मेरा बेहद संजीदा है।
कल रात तुमने मुझसे अपशब्द कहें थे,
मैं नारी हूँ, चलो मैं भूल जाती हूँ।
मैं मर्यादा भूली तो अनर्थ होगा,
चलो सजा में तुमको फूल देती हूँ।
मैं नारी हूँ, सिर्फ इसलिए
मुझे नहीं चाहिए तुमसे सम्मान।
प्रेम और अपनत्व दो मेरे हक़ का,
क्योंकि मैं भी हूँ एक इंसान।
गर्भधारण का भाग्य मुझे मिला है,
दर्द सहने की मुझमें दम है।
नवजीवन की पीड़ा तुम भी जानते हो,
इसमें तुम्हारा योगदान नहीं कम है।
बनावट और झूठे नारीवाद के नाम पर
मैं नशे के मार्ग पर नहीं जाऊँगी।
मैं अपने हिस्से के काम भी कर लूँगी
और तुमको भी मयख़ाने से वापस लाऊँगी।
मुझे भी महिला सशक्तिकरण चाहिए,
रूढ़ियों की बेड़ियाँ तोड़ने में मेरा साथ तो दो!
मैं भी अपना देश आगे बढाऊँगी,
ज़रा समाज की बागडोर मेरे हाथ तो दो!
सच तो है कि
मेरे अस्तित्व के बिना
तुम्हारी कोई अहमियत नहीं!
मैं भी तो अधूरी हूँ तुम्हारे बिना,
फिर कैसे कह दूँ,
मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं!
हँसते हुए रोती, रोते हुए हँसती,
हाँ, मैं समझने में क्लिष्ट हूँ।
मैं तुमसे ना कम, ना ज़्यादा, ना बराबर;
हाँ किन्तु, मैं फेमिनिस्ट हूँ!
-आरती मानेकर

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